समास की परिभाषा

समास की परिभाषा अथवा समास किसे कहते हैं?

दो सार्थक अर्थ वाले शब्दों को मिलाने से बनने वाला नए शब्द को ही समास कहते हैं!

आसान भाषा में जब हमें किसी वाक्य को एक छोटे से शब्द के रूप में व्यक्त करना होता हैं तो हम समास का उपयोग करते हैं!

उदहारण के तौर पर

नीला हैं जो कंठ अर्थात नीलकंठ

देवो का आलय अर्थात देवालय

रात ही रात में अर्थात रातों रात

समास के भेद

समास के छः भेद होते हैं जो निम्नलिखित हैं!

  1. अव्ययीभाव समास
  2. तत्पुरुष समास
  3. कर्मधारय समास
  4. द्विगु समास
  5. द्वन्द समास
  6. बहुब्रीहि समास

samas ki paribhasha or uske bhed

1. अव्ययीभाव समास

जिस समास में पहला पद प्रधान होता है और समस्त पद क्रिया विशेषण का काम करता है उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं!
जैसे की :-
यथाशक्ति:- यथा का अर्थ होता है अनुसार और यथा शक्ति का अर्थ हुआ शक्ति के अनुसार

अव्ययीभाव समास के सम्बन्ध में प्रमुख बातें

  1. इस समास में पूर्व पद की प्रधानता होती है
  2. पूर्व पद अव्यय के अतिरिक्त संघ्या या फिर विशेषण भी हो सकता है
  3. अव्ययीभाव समास केवल दो पदों से ही बनता है, दोनों पदों का अनुक्रम निम्नलिखित हो सकता है!

(क) पहला पद संघ्या और दूसरा पद अव्यय परन्तु समस्त पद अव्यय
जैसे की यथा-जीवन, वर्षभर

(ख) दोनों पद संज्ञा परन्तु समस्त पद अव्यय
जैसे की रातोंरात

(ग) पहला पद अव्यय दूसरा पद संज्ञा तथा समस्त पद अव्यय
जैसे की यथासाध्य

(घ) दोनों पद अव्यय तथा समस्त पद अव्यय
जैसे की पहलेपहल, बीचोंबीच

2. द्विगु समास

द्विगु समास में पूर्व पद संख्यावाची होता है साथ ही दोनों पदों में विशेषण और विषस्य का सम्बन्ध होता है और सम्पूर्ण पद किसी समूह या समाहार का बोध करता है!

जैसे की:-
त्रिभुवन:- तीन भवनों का समूह
पंचतत्व:- पांच तत्वों का समूह
नवरत्न:- नौ रत्नो का समूह
सप्तऋषि:- साथ ऋषियों का समूह
पंचवटी:- पांच वट (वृक्ष) का समाहार

द्विगु समास की प्रमुख बातें

द्विगु समास में पहला पद संख्यावाची होता है और सम्पूर्ण पद समुख का बोध करता है! लेकिन अगर किसी शब्द में पहला पद संख्यावाची हो परन्तु सम्पूर्ण पद समुख का बोध न करवाए तो वह द्विगु समास नहीं होगा!
जैसे की:- दशमुख अर्थात दस है मुख जिसके

3. द्वन्द समास

जिस समास पद के दोनों पद प्रधान हो तथा समास विग्रह करने पर दोनों के बीच समुच्चय वाचक संयोजक (और, तथा, एवं) या फिर विकल्प वाचक संयोजक (या, अथवा) लगें, उसे द्वन्द समास कहते हैं!

जैसे की:-
सुख-दुःख :- सुख और दुःख
सीता-राम :- सीता और राम
ऊंच-नींच :- उँच और नीच
थोड़ा-बहुत :- थोड़ा और बहुत
जात-कुजात :- जात और कुजात

द्वन्द समास के भेद

  1. इतरेतर द्वन्द
  2. वैकल्पिक द्वन्द
  3. समाहार द्वन्द

4. कर्मधारय समास

जिस समास के दोनों पदों के बिच में परस्पर विशेष्य-विशेषण अथवा उपमेय-उपमान का सम्बन्ध हो और दोनों पदों में एक ही करक की विभक्ति आये उसे कर्मधारय समास कहते हैं!

जैसे की
पुरषोतम:- उत्तम है जो पुरुष
नीलगाय:- नीली है जो गाय
चन्द्रमुख:- चंद्र के समान है जो मुख
सद्गुण:- सत है जो गुण

परीक्षाओ में हिंदी व्याकरण से पूछे जाने वाले प्रायवाची शब्द!

5. बहुब्रीहि समास

जिस समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि दोनों पद किसी अन्य पद के विशेषण होते हैं! उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं

जैसे की
चतुर्भुज:- चार हैं भुजायें हैं जिसकी अर्थात विष्णु
नीलकंठ:- नीला हैं जो कंठ
गिरधर:- गिरी को धारण करने वाला अर्थात श्रीकृष्ण
त्रिनेत्र:- तीन हैं नेत्र जिसके अर्थात शंकर जी

6. तत्पुरुष समास

जिस समास में बाद का पद प्रधान होता हो तथा दोनों पदों के बीच का करक-चिन्ह लुप्त हो, वहां तात्पुरष समास होता हैं!

जैसे की
राजकुमार:- राजा का कुमार
सेवामुक्त:- सेवा से मुक्त
भूपति:- भू का पति
गृह प्रवेश:- गृह में प्रवेश

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