first death penalty in independent india in hindi

जानिए आखिर किसको मिली थी First Death Penalty in Independent India

left Nathuram Godse accompanied by Narayan Apte

जानिये किसको मिली थी पहली बार फाँसी की सजा आज़ाद भारत में

30 जनवरी 1948 की तारीख आप सभी को याद होगी या फिर आप लोगो ने इस तारीख के बारे में कभी न कभी पढ़ा जरूर होगा !

जी हां ये वही दिन है जब भारत की आज़ादी में अहम भूमिका निभाने वाली और आज़ादी के आंदोलन को जन जन से जोड़ने वाली महान शख्सियत महात्मा गाँधी जी की दिल्ली में स्थित बिरला हाउस में गोली मार कर हत्या कर दी थी!

Birla House in New delhi where Mahatma Gandhi was assassinated

महात्मा गाँधी की हत्या के आरोप में कुल 9 लोगो पर पर आरोप लगाए गए थे!

  • First Death Penalty in Independent India

इनमे सिर्फ दो लोगो को फांसी की सजा सुनाई गई! ये दो लोग थे नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे!

बाकी बचे 7 लोगो में से एक विनायक दामोदर सावरकर को कोर्ट द्वारा बरी कर दिया गया था और बाकि बचे 6 लोगो को आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई थी!

8 नवम्बर 1949 को महात्मा गाँधी की हत्या के आरोप में नाथूराम गोडसे और नारायण आपटे को मौत की सजा सुनाई गई थी!

15th नवम्बर 1949 को दोनों को फांसी दे दी गई

अपराधियों के नामनाथूराम गोडसे और नारायण आपटे
अपराध महात्मा गाँधी की हत्या
अपराध का दिन30 January 1948
अपराध का स्थानबिरला भवन नई दिल्ली
सजा “To Hang till death”
फांसी का दिन15th November 1949

कौन से कोर्ट ने दी थी नाथूराम गोडसे और नारायण आपटे को फांसी की सजा

भारत के सर्वोच्च न्यायालय का गठन 26 जनवरी 1950 को हुआ था और महात्मा गाँधी के हत्यारो को फाँसी 15 नवम्बर 1949 को दी गई थी

अब आपके दिमाग में ये सवाल जरूर उठेगा की अगर सुप्रीम कोर्ट नहीं था तो सजा किसने दी और सजा के खिलाफ अपील कहाँ पर की गई!

तो आपके सवाल का जवाब है की नाथूराम गोडसे और नारायण आपटे को फांसी की सजा उस समय मौजूद High Court of East Punjab द्वारा दी गई थी!

उस समय जब सुप्रीम कोर्ट नहीं था तब Privy Council के सामने कोर्ट के निर्णय के खिलाफ अपील की जाती थी!

Privy Council द्वारा आरोपियों के परिवार वालो को फाँसी के खिलाफ अपील करने की इज़ाज़त नहीं दी गई थी! इसलिए High Court of East Punjab के फैसले पर अमल करते हुए 15th november 1949 को इन दोनों को फांसी दे दी गई थी!

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